पशुपालन : क्षीरधारा ग्राम योजना से होगा दूध उत्पादन दोगुना

रीवा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा खेती के साथ-साथ दुधारू पशुपालन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें कृषि के साथ-साथ उद्यानिकी और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री जी के प्रदेश में दूध उत्पादन को दोगुना करने के संकल्प को पूरा करने के लिए क्षीरधारा ग्राम योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत पशुपालन विभाग अन्य विभागों के सहयोग से दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए बहुआयामी प्रयास कर रहा है। इस संबंध में उप संचालक पशुपालन ने बताया कि क्षीरधारा ग्राम योजना के तहत पशुपालन विभाग द्वारा दुधारू पशुओं के नस्ल सुधार, उन्नत पशुपालन इकाईयों की स्थापना, दुधारू पशुओं की स्वास्थ्य रक्षा एवं पोषण तथा गोपालन को प्राकृतिक खेती से जोड़कर गांव को तीन वर्ष में क्षीरधारा ग्राम के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है।

उप संचालक ने बताया कि वन क्षेत्रों, वन्यजीव अभ्यारण्य तथा नेशनल पार्कों की पाँच किलोमीटर की परिधि में स्थित गांवों में दो चरणों में क्षीरधारा ग्राम योजना लागू की जा रही है। जागरूक पशुपालकों तथा संयुक्त वन प्रबंधन समिति के सहयोग से दुधारू पशुओं की नस्ल सुधार, हरा चारा उत्पादन तथा पशुओं के टीकाकरण का प्रयास किया जाएगा। निराश्रित गौवंश को गौशालाओं में आश्रय देने के लिए ग्रामीण विकास विभाग का सहयोग लिया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय जिला स्तरीय क्षीरधारा ग्राम संयुक्त समन्वय समिति गठित की गई है। यह समिति दूध का उत्पादन दोगुना करने के लिए पशुपालन विभाग, कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, वन विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रयासों में समन्वय करेगी।

उप संचालक ने बताया कि क्षीरधारा ग्राम योजना के तहत कृषि विकास हरे चारे के उत्पादन, प्राकृतिक खेती, बायोगैस एवं गोबर गैस संयंत्रों की स्थापना तथा जैविक खाद बनाने के लिए किसानों को प्रशिक्षण देगा। पशुपालन विभाग से समन्वय बनाकर दुधारू पशुओं के लिए हरा चारा उपलब्ध कराएगा। ग्राम स्तरीय दुग्ध सहकारी समितियों तथा कृषि उत्पादक संगठनों एफपीओ के माध्यम से दोनों विभागों की योजनाओं में समन्वय किया जाएगा। प्राकृतिक खेती के लिए गोबर और गोमूत्र से खाद तथा कीटनाशक बनाने का प्रशिक्षण किसानों को दिया जाएगा। ग्रामीण विकास विभाग स्वसहायता समूहों के माध्यम से पशुपालन को बढ़ावा देगा। इन सभी विभागों के समन्वय से तीन वर्षों में दूध का उत्पादन दोगुना किया जाएगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी मजबूती आएगी। इससे रोजगार के भी नए अवसर पैदा होंगे। कई उच्च शिक्षित युवा आधुनिक डेयरी यूनिट स्थापित करके सफलतापूर्वक स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

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