पुलिस और अभियोजन अधिकारियों के समन्वय से मिलता है पीड़ित को न्याय

कलेक्ट्रेट के मोहन सभागार में रीवा तथा मऊगंज जिले के लोक अभियोजन अधिकारियों की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने किया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने और अपराधियों को दण्डित करने के लिए पुलिस तथा लोक अभियोजन अधिकारियों को मिलकर कार्य करना है। सही तालमेल से ही अपराधों के संबंध में उचित साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए जा सकते हैं। हमारी तैयारी जितनी अच्छी होगी हमें उतनी ही सफलता मिलेगी। इसके लिए लोक अभियोजन अधिकारियों तथा पुलिस अधिकारियों को नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जाना आवश्यक है। सामाजिक परिस्थितियों में परिवर्तन के साथ कानूनों में लगातार परिवर्तन हो रहे हैं। हाल ही में तीन नए कानून बनाए गए हैं। प्रत्येक नए कानून की समुचित जानकारी होना आवश्यक है।

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि सरकार ने हाल ही में साक्ष्य अधिनियम बनाया है जो बहुत प्रभावी सिद्ध होगा। हर अपराधिक घटना के पीछे कारण अवश्य होता है। पुलिस अधिकारियों को विवेचना के दौरान घटना के कारणों, परिस्थितियों तथा घटना स्थल पर मिले सबूतों को वैज्ञानिक तरीके से एकत्रित करने की जरूरत होती है। अभियोजन पक्ष इसे न्यायालय में जितनी कुशलता से प्रस्तुत करेगा उसी के अनुरूप हमें सफलता मिलेगी। पुलिस अधिकारियों को भी नए कानूनों के संबंध में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ डॉ भूपेन्द्र द्विवेदी मेडिकल आफीसर मेडिको लीगल इंस्टीट¬ूट भोपाल ने फॉरेंसिक साइंस के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ द्विवेदी ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस विज्ञान की वह शाखा है जिसका उपयोग अपराध को सिद्ध करने में होता है। इसकी मेडिको लीगल शाखा में अपराध के संबंध में डॉक्टरों द्वारा चिकित्सकीय प्रमाण दिए जाते हैं। इसकी एफएसएल शाखा में अपराध स्थल से प्राप्त वस्तुओं, रसायन, अन्य साक्ष्यों, मानवीय अंगों आदि के परीक्षण के बाद निष्कर्ष निकाले जाते हैं। इसके लिए पुलिस की क्राइम सीन यूनिट घटना स्थल से साक्ष्य एकत्रित करती है। इस यूनिट में फिंगर पिं्रट विशेषज्ञ तथा कुशल फोटोग्राफर का होना आवश्यक है। फॉरेंसिक विशेषज्ञ जब किसी अपराधिक घटना का विश्लेषण करता है तो उसके मन में घटना क्यों हुई, कहाँ हुई, कैसे हुई तथा कब हुई इन प्रश्नों को ध्यान में रखना चाहिए। हमने अपने विश्लेषण में इन प्रश्नों के सही उत्तर सिलेसिलेवार लिख दिए तो घटना का लगभग सही स्वरूप बता सकते हैं। डॉ द्विवेदी ने फॉरेंसिक साइंस तथा मेडिको लीगल की विभिन्न अवधारणाओं एवं तकनीकों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

कार्यशाला में सहायक जिला अभियोजन अधिकारी श्री रवीन्द्र सिंह ने महिलाओं से संबंधित कानूनी प्रावधानों, पॉक्सो एक्ट की धारा 29 तथा 30 के संबंध में जानकारी दी। श्री सिंह ने एससी-एसटी अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरणों के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में जिला अभियोजन अधिकारी कटनी श्री हनुमंत किशोर शर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के संदर्भ में नवीन संहिताओं पर चर्चा की। वरिष्ठ एडीपीओ श्री सूर्य प्रसाद पाण्डेय ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के प्रावधान तथा इनसे प्रकरणों में पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी। कार्यशाला में श्री शिवप्रसाद पाण्डेय, श्री संतोष शुक्ला तथा सभी लोक अभियोजन अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला का संचालन सुश्री अंजू सिंह ने किया।

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