जिला पंचायत रीवा में आरटीआई कानून की उड़ाई जा रही धज्जियां

शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता। जिला पंचायत रीवा में आरटीआई कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हालात यह हैं की सूचना के अधिकार के तहत दायर किए जाने वाले आवेदनों पर प्रभारी अधिकारी समय सीमा में जवाब नही दे रहे जिसकी वजह से कई अपीलार्थियों को अपील करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

सीईओ ने जिम्मेदारियों से झाड़ा पल्ला, सीईओ ने परियोजना अधिकारी को बना दिया प्रथम अपीलीय अधिकारी
अमूमन होता यह है जिला पंचायत कार्यालयों में लोक सूचना अधिकारी सहायक परियोजना अधिकारी अथवा परियोजना अधिकारी को बनाया जाता है। जबकि प्रथम अपीलीय अधिकारी का दायित्व अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अथवा स्वयं मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दिया जाता है। लेकिन तत्कालीन सीईओ स्वप्निल वानखेडे के कार्यकाल के पहले जिला पंचायत रीवा में जहां पहले मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा स्वयं प्रथम अपीलीय अधिकारी होते थे वहीं स्वप्निल वानखेडे के कार्यकाल से अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी एबी खरे को प्रथम अपीलीय अधिकारी बनाया गया था। तत्कालीन एडिशनल सीईओ एबी खरे के निलंबन और सतना में स्थानांतरण के बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा संजय सौरव सोनवणे स्वयं प्रथम अपीलीय अधिकारी का दायित्व न लेते हुए अब परियोजना अधिकारी स्मिता खरे को प्रथम अपीलीय अधिकारी का दायित्व सौंप दिया है। गौरतलब है की प्रथम अपीलीय अधिकारी के कंधों पर आरटीआई के अपीलीय मामलों की सुनवाई किए जाने और सही निर्णय पारित करने की जिम्मेदारी होती है। परंतु जिस प्रकार बिना किसी ट्रेनिंग और कानून की जानकारी के जिला पंचायत कार्यालयों में कनिष्ठ कर्मचारियों को लोक सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी बनाया जा रहा है उससे स्पष्ट पता चलता है कि पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए जाना जाने वाला भारत का सबसे सशक्त और महत्वपूर्ण कानून सूचना के अधिकार कानून के प्रति नौकरशाहों की अरुचि का कारण कहीं न कहीं इनके भ्रष्टाचार का उजागर होना और जनता और मीडिया के सामने आना है। हालांकि वर्तमान में राहुल सिंह जैसे सूचना आयुक्तों के कारण आरटीआई कानून के प्रति नौकरशाही में काफी खौफ है और जानकारी न देने पर ताबड़तोड़ जुर्माने और अनुशासनात्मक कार्यवाहियों का भी दौर जारी है।

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है जिला पंचायत रीवा में मुख्य कार्यपालन अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं और सूचना के अधिकार कानून का मजाक बनता जा रहा है।

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