SC/ST एक्ट मामले में अग्रिम जमानत याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे पत्रकार अजित भारती

दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूबर और पत्रकार अजित भारती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि भारती के खिलाफ SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है, इसलिए कानून में अग्रिम जमानत पर लगे वैधानिक प्रतिबंध के कारण याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। कोर्ट ने इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा 7 सितंबर को जमानत खारिज करने के आदेश को सही माना था। पूरा मामला 22 अगस्त को भारती के वेरिफाइड सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड किए गए एक वीडियो से जुड़ा है। शिकायत आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बालकराम बौद्ध ने दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर 23 अगस्त को नॉर्थ एवेन्यू थाने में FIR दर्ज हुई। आरोप है कि वीडियो में नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद और डॉ. बी.आर. अंबेडकर को लेकर जातिगत टिप्पणी और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिसे 23 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइव देखा था। हाईकोर्ट ने वीडियो और उसके ट्रांसक्रिप्ट की जांच करने के बाद कहा कि भारती ने बार-बार जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और शादी जैसी संस्था के संदर्भ में सवर्ण बनाम दलित की श्रेष्ठता का भाव दिखाया, जो SC/ST एक्ट के तहत अपमानित करने के इरादे को दर्शाता है। कोर्ट ने कहा कि ये टिप्पणियां सामान्य या आवेश में कही गई बातें नहीं थीं, बल्कि स्पष्ट रूप से जाति आधारित अपमान थीं। 

वहीं फैसले के बाद अजित भारती ने कहा है कि वह हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उनका कहना है कि हाईकोर्ट की टिप्पणियां केवल जमानत याचिका तक सीमित हैं, इससे अपराध सिद्ध नहीं होता। भारती ने दावा किया कि उनके खिलाफ मामला गलत है और उन्हें परिवार के सम्मान की रक्षा करने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने जानबूझकर किसी समुदाय का जातिगत अपमान नहीं किया और वह SC/ST एक्ट के प्रावधानों का विरोध व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात आगे भी जारी रखेंगे।

फ़िलहाल अजित भारती केस को समझने के लिए संछिप्त विवरण –

  • क्या हुआ : दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्रकार अजित भारती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।
  • क्यों : कोर्ट ने कहा SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) का प्रथम दृष्टया मामला बनता है, इसलिए जमानत नहीं मिल सकती। जस्टिस सौरभ बनर्जी का फैसला।
  • FIR किस पर : 23 अगस्त को नॉर्थ एवेन्यू थाने में, आजाद समाज पार्टी नेता बालकराम बौद्ध की शिकायत पर अजित भारती पर।
  • आरोप : चंद्रशेखर आजाद और अम्बेडकर पर जातिगत टिप्पणी।
  • अजित भारती का पक्ष : फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे, कहा – टिप्पणी जमानत तक सीमित है, अपराध सिद्ध नहीं। परिवार के सम्मान की रक्षा के लिए बोला, जानबूझकर जातिगत अपमान नहीं किया।

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