धान की फसल में पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप, कृषि विभाग ने किसानों को किया सतर्क

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा जिले में हाल में हुई लगातार वर्षा एवं खेतों में जलभराव की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए धान की फसल में पत्ती लपेटक कीट के प्रकोप की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। विभाग के अधिकारियों ने ग्राम पथरिया, पन्नी एवं खर्रा टोला में किसानों के खेतों का भ्रमण कर फसलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकांश खेतों में पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप पाया गया। कृषि अधिकारियों ने बताया कि पत्ती लपेटक कीट की सूंडियां धान की पत्तियों को आपस में जोड़कर लपेट लेती हैं और पत्तियों के अंदर छिपकर हरी सतह एवं क्लोरोफिल को खुरचकर खाती हैं। इससे पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देने लगती हैं तथा अधिक प्रकोप होने पर फसल की प्रकाश संश्लेषण क्षमता प्रभावित हो सकती है।

कृषि विभाग ने किसानों को पत्ती लपेटक कीट के नियंत्रण के क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 9.3 % + लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 4.6% ZC-80 से 100 मिलीलीटर प्रति एकड़ या इंडोक्साकार्ब 14.5% SC-150 मिलीलीटर प्रति एकड़ अथवा थायामेथोक्सम 12.6% + लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन 9.5% ZC-60 से 80 मिलीलीटर प्रति एकड़ में से किसी एक कीटनाशक का निर्धारित मात्रा में प्रयोग किया जा सकता है। अनुविभागीय अधिकारी ( कृषि ) ने जिले के कृषकों से अपील की है कि वे अपने धान के खेतों का नियमित निरीक्षण करें। पत्तियों पर पत्ती लपेटक कीट के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल कृषि विभाग के मैदानी अमले अथवा कृषि विज्ञान केंद्र रीवा के वैज्ञानिकों से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त करें। खेतों के भ्रमण के दौरान अनुविभागीय अधिकारी (कृषि ) मऊगंज रवि बघेल, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी उमेश चंद्र तथा कृषि विस्तार अधिकारी अरुण इंगला एवं श्री सुरपाल चौहान उपस्थित रहे।

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