थाना प्रभारी के तानाशाह रवैए से लोग परेशान, कभी पत्रकार तो कभी आम जनता से तकरार

अनूप गोस्वामी, जवा। शासन – प्रशासन द्वारा क्षेत्र में शांति व्यवस्था को बनाये रखने के लिए एवं अपराध पर अंकुश लगाने के लिए जगह – जगह पर थानों एवं पुलिस चौकियों की व्यवस्था बनाई गई है। साथ ही लोग चैन से अपना जीवन – यापन कर सकें, व्यवसाय कर सकें, आदि के लिए तेज तर्रार पुलिस बल को जनता की सेवा में लगाया जाता है। लेकिन कुछ जगहों से जो खबरें आती हैं वो कहीं न कहीं अफसरसाही की ओर इशारा करती हैं।

पहला मामला है पत्रकार के साथ अभद्रता का
जानकरी के मुताबिक डभौरा अनुभाग की जवा थाना प्रभारी उपनिरीक्षक गीतांजली सिंह द्वारा विगत 13 अगस्त को जवा थाने में पत्रकार विजय कुमार तिवारी को अपमानित किया गया एवं पत्रकारिता को लेकर बेहद ही अभद्र व अशोभनीय टिप्पणी की गई। पूरा मामला कुछ इस प्रकार बताया गया कि, पत्रकार विजय कुमार तिवारी कुछ आवश्यक कार्य से जवा थाना गए हुए थे। वहीं थाना परिसर में मोबाइल पर कुछ कार्य को लेकर आवश्यक बात कर रहे थे। पत्रकार विजय कुमार तिवारी का बात करना शायद थानाप्रभारी को पसंद नहीं आया, जिसके बाद बात करने के दौरान ही थाना प्रभारी पत्रकार पर बरस पड़ीं और कई बार अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए पत्रकार को अपमानित किया। जब पत्रकार द्वारा यह बताया गया कि मैं पत्रकार हूँ और किसी आवश्यक कार्य को लेकर बात कर रहा था तो थानाप्रभारी और बिखर गईं। फिर तो पत्रकार के साथ – साथ पत्रकारिता पर भी बिफर पड़ीं और अनाप – शनाप अभद्र टिप्पणियां करने लगीं और कहा कि मैं ऐसे पत्रकार दिन-भर पैदा करती हूँ, दुबारा यहाँ दिखना नहीं और पत्रकार नाम बताना नहीं।

दूसरा मामला है पीड़ित कह कुछ और रहा रिपोर्ट कुछ और
जवा थाना अंतर्गत ग्राम सितलहा निवासी पीड़ित नमन चर्मकार एवं उनके चाचा ने जवा थाना प्रभारी एवं उनके स्टाफ के ऊपर सही तरीके से मारपीट की रिपोर्ट ना लिखे जाने एवं थाने परिसर के अंदर अभद्रता से बात करने एवं बदसलूकी का आरोप लगाया है। वहीं पीड़ित ने यह भी बताया कि मारपीट करने वाले आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार भी नहीं किया गया एवं आरोपी के परिवार वाले पीड़ित को जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं। सोचने वाली बात यह है कि मामला संज्ञान में आने के बाद भी आरोपी पर अब तक कोई कार्यवाई नहीं हुई।

जानकारी के मुताबिक ऐसा नहीं कि सिर्फ दो ही मामले हैं थाना प्रभारी के खिलाफ। आरोप है कि कई बार कई लोगों पर थाना प्रभारी का गुस्सा बरस चुका है और इस सम्बन्ध में आला अधिकारीयों को भी मौखिक और लिखित में जानकारी दी जा चुकी थी, बावजूद आज तक शायद ऊँची पहुँच और रुतबे कि वजह से कोई भी आला अधिकारी इन पर कार्यवाई नहीं कर पाया। आपको याद दिला दें हाल ही में एक मामले को लेकर जवा चौक में जनता ने थाना प्रभारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।

एक नज़र
थाना प्रभारी की पत्रकारिता पर ऐसी अभद्र टिप्पणी, व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनो की मर्यादा हनन करने वाली है। एक ओर जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारिता को चौथा स्तम्भ कहा जाता है, वहीं इस तरह के मामले कहीं न कहीं लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बेड़ियाँ लगाने जैसा है। पत्रकारों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा व्यवस्था दी जा चुकी है कि पत्रकार भीड़ का हिस्सा नहीं है और पत्रकार के समाचार संकलन अथवा समाचार संकलन हेतु अध्ययन आदि पर कोई बाधा उतपन्न नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा कोई करता है तो वह दण्डनीय है। इसके बावजूद भी पत्रकार और पत्रकारिता शब्द से थाना प्रभारी का घृणा का भाव निश्चित रूप से कार्यपालिका, व्यवस्थापिका एवं न्यायपालिका के लिए विचारणीय बिंदु है। साथ ही यह पत्रकारिता का ही नहीं बल्कि लोकतंत्र का घोर अपमान है। घटना के सम्बन्ध में पत्रकार संघ जवा के अध्यक्ष मनोज शुक्ल द्वारा एसडीओपी अश्विनी कुमार से मिलकर ज्ञापन सौंपा है और कार्यवाई के लिए कहा है।

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