जिले में भी दिखा डॉक्टरों के हड़ताल का असर, रोगियों के उपचार की वैकल्पिक व्यवस्था

डॉक्टरों के विभिन्न संगठनों के द्वारा की गई हड़ताल की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने कई वैकल्पिक प्रबंध किए। निजी अस्पतालों के डॉक्टर एवं सेवानिवृत्त डॉक्टरों की सेवाएं संजय गांधी हास्पिटल तथा अन्य सरकारी अस्पतालों में ली गईं। कमिश्नर अनिल सुचारी तथा कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने श्यामशाह मेडिकल कालेज के विभिन्न विभागाध्यक्षों, हड़ताली डॉक्टरों के संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करके स्थिति से निपटने के लिए तात्कालिक प्रबंध किए। बैठक में कमिश्नर श्री सुचारी ने कहा कि डॉक्टरों की उचित माँगों के संबंध में शासन-प्रशासन स्तर पर विचार किया जा रहा है। उचित मांगे अवश्य पूरी होनी चाहिए। वरिष्ठ अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया गया है। डॉक्टरों की समस्याओं का शीघ्र निदान हो रहा है। डॉक्टर अपनी माँगों के लिए हड़ताल पर जाने के साथ रोगियों के उपचार के नैतिक दायित्व को भी निभाएं।

कमिश्नर ने कहा कि डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास का संबंध होता है। इस विश्वास को डॉक्टर बनाए रखें। हड़ताल के बावजूद आप सबने सुबह रोगियों का उपचार किया तथा आपातकालीन उपचार सेवाओं में भी सहयोग किया। मानवीय दृष्टिकोण से हड़ताल में रहते हुए भी अति आवश्यक होने पर रोगियों की सेवा अवश्य करें। बैठक में डॉक्टरों के एसोसिएशन की ओर से बताया गया कि शासन-प्रशासन को माँगों के संबंध में लगातार अवगत कराया गया। सांकेतिक हड़ताल के बाद उच्च स्तर पर बैठक करके 31 मार्च को ही कई निर्णय लिए गए। इन्हें लागू कर देने पर हमारी अधिकांश माँगे पूरी हो जाएंगी। हड़ताल में जाने के बावजूद आवश्यक होने पर सभी डॉक्टर मरीजों की सेवा से पीछे नहीं हटेंगे। बैठक में अस्पतालों में उपचार की वैकल्पिक व्यवस्था तथा हड़ताल से उत्पन्न स्थितियों में नियंत्रण के संबंध में कई निर्णय लिए गए। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ सौरभ सोनवणे, मेडिकल कालेज के डीन डॉ मनोज इंदुरकर तथा अन्य चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे।

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