लापरवाही : आवारा पशुओं के हवाले दिखी कृषि उपज मंडी की कमान, कौन है मेहरबान

बघेड़ी। अब सड़कों पर छोड़िये क्यूंकि कहीं अस्पताल में कुत्ता या सांड दिख जाता है तो कहीं मरीजों के विस्तर पर कुत्ता सोता नज़र आता है। प्रशासन चाहे जितना दम भर ले अव्यवस्थाओं का अम्बार नज़र आता है। ऐसे ही संचालित विभिन्न शासकीय कार्यालयों में आए दिन अव्यवस्थाओं को लेकर मामला पढ़ने – देखने में आता रहता है। जिसके पीछे की वजह यह भी हो सकती है कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उक्त कार्यालयों में समय – समय पर जाँच या निरीक्षण नहीं किया जाता है और स्थानीय अधिकारियों में लापरवाही और मनमानी देखने को मिलती रहती है। हाल ही में ऐसा ही कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चाकघाट और त्योंथर में भी देखने को मिला था, जिसको लेकर खबरों ने जोर पकड़ा था। फ़िलहाल व्यवस्थाओं में सुधार देखने को मिला है।

हालिया खबर कृषि उपज मंडी बघेड़ी चाकघाट की है, जहाँ व्यवस्थाओं के नाम पर महज खानापूर्ति नज़र आई है। लोगों द्वारा पहले भी अव्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े किये गए थे। मिली जानकारी के अनुसार एक बार फिर व्यापारियों, किसानों, तुलावटी, हम्माल सहित विभिन्न विषयों को लेकर समस्यायें बनी हुई है। शासन – प्रशासन द्वारा दी जा रही व्यवस्थाओं के बावजूद भीषण गर्मी में पीने योग्य पानी, शौचालय आदि के लिए लोग जूझते नज़र आते हैं। लोगों की माने तो उपज मंडी के अंदर और बाहर दर्जनों लोग बिना अधिकृत विपणन पंजीकरण के ही अनाजों की खरीद फरोख्त करते हैं। साथ ही मध्य प्रदेश – उत्तर प्रदेश सीमा से लगे होने की वजह से मध्य प्रदेश – उत्तर प्रदेश में अनाजों के अवैध परिवहन की भी शिकायतें हैं, जिस पर नकेल लगाना बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब अगर अवैध व्यापर और परिवहन पर अंकुश नहीं लगेगा तो मंडी कर में भी हेराफेरी होगी, जिससे व्यवस्थायें और बिगड़ेंगी। साथ ही कृषि उपज मंडी प्रांगण में साफ-सफाई, रख – रखाव सहित अन्य समस्याओं पर जिम्मेदारों की लापरवाही देखने को मिली है। व्यापारियों की मानें तो मंडी प्रांगण से अक्सर अनाज की बोरियाँ अक्सर चोरी हो जाती हैं और आवारा पशु भी भारी क्षति पहुंचा रहें है। कई व्यवस्थाओं को लेकर क्षेत्रीय किसानों ने भी मंडी प्रशासन पर सवाल खड़ा किया है। कई किसानों का कहना है कि पहले खेत में प्रकृति कि मार झेलो फिर मंडी में लगे दलालों को झेलो। खरीद – फरोख्त में कई बार मनमानी वसूली होती है जिसको लेकर कई बार बबाल भी हो चूका है लेकिन कोई सुनाने वाला नहीं है।

एक नज़र
सरकार जनता को लाभ पहुँचाने के लिए क्या – क्या नहीं करती लेकिन सरकारी तंत्र से जुड़े कई कर्मचारी सिर्फ अपना और अपनों के हितैषी बने रहते हैं। जिसकी वजह से कई बार व्यवस्थाओं में भारी लापरवाही देखने को मिलती है तो कई बार सामने वाले को भी भारी नुकसान झेलना पड़ जाता है। ऐसे ही कृषि उपज मंडी बघेड़ी चाकघाट में व्याप्त विभिन्न अव्यवस्थाओं में मंडी सचिव एवं उनके कर्मचारियों की भारी लापरवाही नज़र आ रही है और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा बैठक के पश्चात जमीनी हकीकत जानने हेतु प्रयास भी नहीं किए जा रहे। जिसकी वजह से वो स्वयं भी जिम्मेदार माने जा रहे। नाम न छापने के शर्त पर कुछ लोगों ने बताया कि मंडी सचिव और कई कर्मचारी अक्सर मुख्यालय से बाहर रहते हैं। अब इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो अगर अधिकारीयों द्वारा औचक निरीक्षण किया जाये तो बहुत कुछ निकल कर सामने आयेगा।

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