चैत्र नवरात्र में होती है कन्या पूजा फिर नवजात बच्ची का बहिष्कार क्यों

चाकघाट। मानवता को शर्मसार करने वाला एक वाक्या संज्ञान में आया है। जहाँ तक़रीबन दोपहर 12 बजे के आसपास एक नवजात बच्ची को मरने के लिए गौरा गांव के सुनसान इलाके में छोड़ दिया गया। लोगों की माने तो मासूम बच्ची का जन्म कुछ ही घंटो पहले हुआ होगा और उसके साथ इतना बड़ा हादसा हो गया। मामले को लेकर भाजपा महिला मोर्चा की जिला उपाध्यक्ष सरोज तिवारी जी बताती हैं कि जैसे ही नवजात बच्ची कि सुनसान में मिलने कि खबर मिली बिना समय गवाएं मौके पर पहुंची और उसी दौरान चाकघाट थाना प्रभारी को जानकारी भी दी। मामला उत्तर प्रदेश – मध्य प्रदेश कि सीमा का था इसलिए नवजात बच्ची कि जानकारी नारीबारी चौकी प्रभारी को भी दी गई। फ़िलहाल उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा बच्ची को प्राथमिक इलाज के लिए माँ शारदा अस्पताल नारीबारी में रखा गया है जहाँ से चाइल्ड केयर बच्ची को अपनी कस्टडी में ले जाएगी।

चैत्र नवरात्र में होती है कन्या पूजा फिर “गौरा” का बहिस्कार क्यों
इस घटना से लोगों में काफी आक्रोश है। क्यूंकि एक तरफ चैत्र नवरात्री का पावन समय चल रहा ऊपर से आज दुर्गाष्टमी भी है और बच्ची को जिस स्थान में अकेला छोड़ा गया उस गांव का नाम भी गौरा है। गनीमत ये थी कि लोगों कि नज़र बच्ची पर पड़ गई और समय रहते उसे राहत पहुंचा दी गई। अब दोनों ही राज्यों कि पुलिस से उम्मीद है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए बच्ची के माता – पिता, घर – परिवार को तलाशे और ऐसा घृणित कार्य करने के लिए कठोर दंड दिलवाये। मामले का दूसरा पहलू भी हो सकता है इसलिए आसपास कि सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में भी जाँच करें हो सकता है वहाँ से कोई सुराग हाँथ लग जाये।

महिला मोर्चा की जिला उपाध्यक्ष सरोज तिवारी भी मौके पर
घटना कि जानकारी लगते ही महिला मोर्चा की जिला उपाध्यक्ष सरोज तिवारी जी मौके पर पहुँच गई। उनके द्वारा घटना को शर्मनाक बताया गया। उन्होंने प्रशासन का बच्ची के जल्द से जल्द प्राथमिक उपचार पर ध्यान खींचा। मामले को लेकर सरोज जी ने कहा कि हम इक्कीशवीं शदी में जी रहे हैं और अभी भी क्या लड़का – लड़की में भेद करना उचित है ? नवजात बच्ची को इस तरह से सुनसान में छोड़ना अन्याय है और ऐसे कृत्य पर लगाम कसने के लिए दोषी पर शख्त कार्यवाई होनी चाहिए।

अस्पताल पर भी शक कि सुई
मामले को लेकर अस्पतालों को भी खंगाला जा सकता है। हालांकि दोनों ही राज्यों में भाजपा सरकार है तो शायद क़ानूनी बाध्यता भी आड़े नहीं आएगी। अब देखना होगा कि बाबा के राज में बच्ची को न्याय कब तक मिल पायेगा।

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