अपने ही पैसे के लिए दर – दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं किसान

जनवरी माह में ही धान उपार्जन पूरा हो चूका था लेकिन कई किसानों का अभी तक धान उपार्जन का पैसा मजधार में है। जिसके लिए किसान दर – दर भटक रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है।

विस्तार से-
सज्ञांन में आया मामला उपार्जन केंद्र सेवा सहकारी संस्था सोहरवा (2325027) – (59025025) का है। जहाँ किसान दिनेश कुमार पिता अमरनाथ विश्वकर्मा द्वारा 19 दिसंबर 2022 को 177 बोरी धान सेवा सहकारी संस्था सोहरवा में बेंची जाती है और उसकी पावती भी ली जाती है। समिति द्वारा जो पावती (पत्रक) दी जाती है उसके नीचे लिखा हुआ है, ” इस रसीद के अनुसार खरीदी गई अनाज की मात्रा का स्वीकृति पत्रक जारी होने के 7 दिन के भीतर आपके बैंक खाते में भुगतान की राशि भेज दी जायेगी। “ एक तरफ सरकारी कागज पर यह नोट लिखा हुआ है और दूसरी तरफ तक़रीबन 2 महीने बाद भी किसान अपनी बेंची हुई फसल के भुगतान से वंचित है। किसान दिनेश कुमार ने बताया जब इस समस्या से निपटने के लिए सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करवाई तो वो भी बिना किसी सर – पैर के बंद कर दी गई और बताया गया कि निराकरण हो गया है जबकि किसान को पैसे मिले ही नहीं। किसान ने दुबारा शिकायत दर्ज करवाई जो शायद अभी तक लंबित है।

अब ऐसे में सवाल सीधा है कि कलेक्टर रीवा द्वारा लगातार सीएम हेल्पलाइन पर गंभीरता से काम करने के लिए निर्देशित किया जाता है बावजूद इसके ऐसी लापरवाही क्यों ? आखिर किसान को उसके पैसों का भुगतान लंबित क्यों है ? और ऐसे कितने किसान हैं जो अभी तक भुगतान से वंचित हैं ?

आपके सुझाव एवं शिकायत का स्वागत है, ख़बर देने के लिए संपर्क करें – +919294525160

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