चाकघाट। स्थानीय नगर परिषद कार्यालय में जहाँ कभी लोगों की पीड़ाओं का त्वरित समाधान होता था जन समस्याएँ लेकर लोग पहुँचते थे और उसके निदान के लिए तत्कालीन सीएमओ श्रीमती रूपाली द्विवेदी विभागीय कार्य को संपन्नकरा के लोगों को राहत प्रदान करती रही अब उसी नगर परिषद कार्यालय में सन्नाटा बिखरा रहता है।लोग यदि किसी काम के लिए कार्यालय जाते हैं तो उन्हें निराशा ही हाथ लगती है और वे खाली हाथ लौट आते हैं। नगर परिषद में पदस्थ रही मुख्य नगरपालिका अधिकारी श्रीमती रुपाली द्विवेदी के स्थानांतरण के पश्चात यहाँ कोई अस्थाई रूप से कार्य हेतु सीएमओ नहीं आया है। प्रभार के सहारे काम चल रहा है।
प्रायः प्रभारी केवल शासकीय योजनाओं की जानकारी और विभागीय कर्मचारियों के हितों के बातों तक ही सीमित रह जाते हैं। कर्मचारियों की उपस्थिति भी अधिकारी के अभाव में सही ढंग से नहीं हो पाती। कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहता है। ज्यादातर कर्मचारी कार्यालय में पहुँचकर विभागीय कार्यों की औपचारिकता पूरी कर रहे हैं। जन समस्याओं के निदान के लिए न तो कर्मचारियों में कोई उत्साह दिखता, न हीं प्रशासनिक अधिकारी का कोई भय रह जाता है।अब तो लोगों को यह लगने लगा है कि कार्यालय में जाएँगे तो उनकी बातें सुनने समझने के लिए कोई मिलेगा ही नही। इसलिए अब लोगों ने कार्यालय में जाना ही छोड़ दिया है जिसका परिणाम यह है कि संस्था में कार्यरत कर्मचारी मनमाने ढंग से पहुँचते हैं और जब जी में आता है वापस लौट आते हैं। ऐसी स्थिति में जहाँ कभी नगरपरिषद चाकघाट जन समस्याओं के निदान के लिए तत्पर रहा है अब वही कार्यालय वीरान एवं जनहित से जुड़ी भावनाओं से भिन्न दिखाई देने लगा है। जिला प्रशासन एवं शासन से नगर क्षेत्र के वासियों का आग्रह है कि चाकघाट नगर परिषद में अस्थाई रूप से सीएमओ की स्थापना की जाए। प्रभार के सहारे मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित इस नगर परिषद को चलाना जनहित में नहीं होगा।
- रामलखन गुप्त, वरिष्ठ पत्रकार




