भगवान भरोसे चल रही त्योंथर क्षेत्र की आंगनबाड़ियाँ

त्योंथर, रीवा। कहीं भवन जर्जर तो कहीं दूसरों ने किया कब्ज़ा

आँगनबाड़ी को बच्चों की भूँख और कुपोषण से निपटने के लिए एकीकृत बाल विकास सेवा कार्यक्रम के भाग के रूप में, साल 1975 में भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया था। माँ और बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आंगनबाड़ी योजना का शुभारंभ किया गया। आंगनबाड़ी केंद्र 6 वर्ष तक की आयु के बच्चों के साथ – साथ किशोर युवतियों, गर्भवती महिलाओ के स्वास्थ्य से संबंधित आवश्यकताओं, आदि की पूर्ति करने हेतु स्थापित हुआ था। आंगनबाड़ी छोटे बच्चों के पोषण स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी जागरूकता फैलाने का केंद्र है।

लेकिन, क्या सरकार द्वारा लागू आंगनबाड़ी योजना सुचारु रूप से चल पा रही है ?

हाल ही में एक मामला उठा जनपद पंचायत त्योंथर की चुनरी ग्राम पंचायत से , जहाँ पाया गया कि तक़रीबन 10 साल पहले आंगनबाड़ी को भवन स्वीकृत हो चूका था, लेकिन आज तक (24 -11 -2022) आंगनबाड़ी संचालन शासकीय प्राथमिक पाठशाला चुनरी में ही हो रहा है। साथ ही पाया गया कि जिस कुपोषण से लड़ने के लिए इस योजना को लागू किया गया था , वो योजना ही धीरे  – धीरे कुपोषण का शिकार हो रही है। अब ऐसा क्यों है और अब तक इस मामले को लेकर क्या कदम उठाये गए को लेकर जब आंगनबाड़ी सेविका से बातचीत हुई तो बेहद गंभीर और डराने वाले तथ्य सामने आये।

आंगनबाड़ी भवन या खण्डहर
आंगनबाड़ी संचालिका से जब आंगनबाड़ी भवन को लेकर सवाल किये गए तो उन्होंने बताया , कि आज तक उनको भवन प्रदान ही नहीं किया गया क्यूँकि किसी कारण बस अब तक आंगनबाड़ी भवन निर्माणाधीन ही है। मामले कि गंभीरता समझ में आई तो पंचायत से जुड़े कुछ और लोगों को भी टटोला गया।
सूत्रों के मुताबिक भवन अभी भी अधूरा है , जैसे कि फर्श तैयार नहीं है , शौचालय बना नहीं है , दरवाजे लगे नहीं है तो फिर वो पैसा वो कोष गया कहाँ ???
इतना ही नहीं संचालिका डरी – सहमी भी हैं क्यूंकि भवन में कुछ लोगों ने कब्ज़ा भी जमा लिया है। जब उनसे इस मामले में शिकायतों को लेकर सवाल किया गया तो उनका कहना था , कि हम किसी से विरोध नहीं लेंगे इसलिए हम शिकायत भी नहीं करेंगे।

एक नजर
आख़िर इतनी बड़ी और गरीबों के लिए सहायक, योजना का धीरे – धीरे जर्जर होना कहीं न कहीं अनियमितता एवं भ्रस्टाचार कि ओर इंगित कर रहा है। कहने को तो रजिस्टर में खाना पूर्ति का पूरा ध्यान रखा जाता है तो फिर इतनी छोटी – छोटी बातों को दरकिनार कर बड़ी लापरवाही का इंतजार क्यों किया जा रहा है ?
आंगनबाड़ी हो या प्राथमिक पाठशाला, मिलने वाला खाना महज खानापूर्ति बन कर रह गया है।

सवाल आप सबसे
रजिस्टर के अनुसार, सौ फीसदी बच्चे न तो पाठशाला में उपस्थित पाए जाते हैं ना तो आंगनबाड़ी में फिर उनके हिस्से का खाना किसके झोले में जाता है ?

ऐसी और भी आंगनबाड़ी होंगी जहां कि कहानी या तो भय से प्रभावित होगी या फिर ………

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