हाल ही में स्वछता ही सेवा है कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश शासन द्वारा आयोजित कराया गया था। इस दौरान मंत्रालय ने स्वच्छता के लिए बड़े पैमाने पर वकालत और नागरिक भागीदारी की सुविधा प्रदान की, बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाए और गंदे और कठिन कचरा स्थलों को साफ किया, स्वच्छता और घर की सफाई के लिए स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया। यहाँ तक की स्वछता के सन्देश को लेकर कई बार लोकसभा सीट रीवा से सांसद जनार्दन मिश्र द्वारा प्रवास के दौरान सार्वजनिक शौचालय, विद्यालय या निजी शौचालयों की सफाई करते हुए आम जनता को स्वच्छ भारत मिशन के तहत साफ – सफाई के लिए प्रेरित भी किया गया। बावजूद सरकार के अपने कर्मचारियों द्वारा ही स्वच्छता ही सेवा है कार्यक्रम की मिट्टी पलीद कर दी गई।
सड़क किनारे शौच के बावजूद जारी हुआ ओडीएफ
मामला मध्यप्रदेश के रीवा जिले के नगर परिषद् चाकघाट का है। जहाँ के अधिकारीयों द्वारा तक़रीबन साल भर पहले बाहर शौच क्रिया से मुक्त नगर परिषद् चाकघाट को लेकर ओडीएफ जारी किया गया था लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। सड़क किनारे पसरी गंदगी को लेकर पहले भी कई बार चाकघाट नगर परिषद् अधिकारी संजय सिंह जी को अवगत कराया गया लेकिन उनके द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई। यहाँ तक की उन्होंने बाहर निकलकर या अन्य कर्मचारियों को आदेशित भी नहीं किया। एक सेवा निवृत वरिष्ठ नागरिक द्वारा जब जारी ओडीएफ की पोल खोली गई तो कुछ दिन के लिए नगर परिषद् प्रशासन ने अपने सफाई वेंडरों की क्लास ली लेकिन उसका भी जमीन पर कोई असर नहीं दिखा।
हालत ये है की भोर में स्वास्थ्य लाभ के लिए टहलने वाले लोगों के लिए मंत्री चौराहे से बॉर्डर, बघेड़ी से सोनौरी रोड, बघेड़ी से चंदई तरफ शौच करते लोगों को नजरअंदाज कर आगे बढ़ना पड़ता है। मतलब स्वच्छ हवा और स्वास्थ्य लाभ के लिए निकले लोगों को चाकघाट नगर परिषद् के अधिकारियों की लापरवाही के चलते वापस गंदगी से ही लौटना पड़ता है। ऐसा तब है जब चारों तरफ स्वछता ही सेवा जैसे स्लोगन को लेकर स्वच्छ भारत मिशन को सफल दिखाने का प्रयास किया जा रहा है।




