त्योंथर तहसील के विभिन्न घाटों पर धड्डले के साथ नदी में हैवी मशीन लगाकर रेत का उत्खनन किया जाता है। पर तहसील से लेके जिला तक के खनिज, राजस्व और पुलिस के अधिकारी मौन है। मामले में कार्यवाही हल्की – फुल्की कर वाहवाही लूटी जाती है जबकि तहसील मुख्यालय के कोटरा खुर्द, लवरपुरवा, बरुआ सहित एक दर्जन गांवो के घाटों पर हैवी मशीन लगी है। धड्डले के साथ रेत का उत्तखन्न कर तहसील के विभिन्न विभागों के मुखिया के शासकीय आवास के सामने से परिवहन किया जाता है। बेखौफ रेत माफिया पर प्रशासन मौन है। ज्यादातर पुलिस की कार्यवाही मुखबिर की सूचना पर होती पर शायद मुखबिर तंत्र भी त्योंथर तहसील में रेत माफिया पर फेल है। वही सूत्रों की माने तो ज्यादातर माफिया चौकी थाने तहसील और खनिज विभाग कार्यालय के आसपास ही डेरा डाले रहते हैं। आवभगत करते है। अपुष्ट सूत्रों की माने तो रेत माफियाओ के द्वारा रेत उत्खनन से लेके परिवहन तक की महिनवारी फिट है। शायद इसलिए रेत उत्खनन और परिवहन करने वालो पर कोई कार्यवाही नहीं होती। पर देखना होगा त्योंथर के कोटरा , बरुआ सहित अन्य घाटों पर कब तक कार्यवाही होगी या यूं ही रेत माफियाओं पर प्रशासन मेहरबान रहेगा!




