रीवा के सिरमौर क्षेत्र में में कलेक्टर के खिलाफ नाराज ग्रामीण अब लामबंद हो हो गए हैं। सभी ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी दे डाली है। सभी लामबंद होकर जमकर नारेबाजी कर रहे हैं। जहां तनाव घटने की जगह अब और बढ़ गया है।
दरअसल, प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में जल सत्याग्रह के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की 22 अक्टूबर को मौत हो गई थी। इस मामले में अब कलेक्टर और मृतका के पति के बयानों के बीच विवाद बढ़ गया है। कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने जांच के बाद महिला की मौत गिरने से होने की बात कही है। वहीं, पति जमुना कोल ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा- उनकी पत्नी किसी खाई या ऊंचाई से नहीं गिरी थी। बल्कि तबीयत बिगड़ने के बाद जमीन पर बैठी और दम तोड़ दिया।
पति बोला- कलेक्टर झूठ बोल रहे
जमुना कोल ने आरोप लगाया कि कलेक्टर मौके पर कभी आए ही नहीं। न ही उनसे मिले। इसके बावजूद अब मौत को लेकर बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा- कलेक्टर साहब यहां कभी आए नहीं। न मुझसे मिले। अब झूठ बोल रहे हैं। वो बड़े अधिकारी हैं, इसलिए कुछ भी कर सकते हैं। पूरे मामले में को कांग्रेस के बड़े नेता जीतू पटवारी, उमंग सिंगार और जिलाध्यक्ष राजेंद्र शर्मा पहले ही मोर्चा खोल चुके हैं। जीतेंद्र कोल, श्यामकली कोल, संगीता कोल ने बताया कि विमला कोल की मौत केवल और केवल जलसत्याग्रह में शामिल होने से हुई क्योंकि उस वजह से उसकी तबीयत बहुत खराब हो गई थी।
पति बोला- जल सत्याग्रह के फोटो-वीडियो मौजूद
जमुना कोल के मुताबिक, वह और उनकी पत्नी दोनों हर दिन जल सत्याग्रह में शामिल हो रहे थे। उनके पास सत्याग्रह में शामिल होने के फोटो और वीडियो भी उपलब्ध हैं। इसी दौरान पत्नी की तबीयत बिगड़ी थी। अगले ही दिन उसकी मौत हो गई। पति का कहना है कि पत्नी किसी ऊंचाई या खाई से नहीं गिरी थी। तबीयत खराब होने के कारण वह जमीन पर ही बैठ गई। फिर दम तोड़ दिया।
कलेक्टर ने जांच में गिरने से मौत की बात कही
शनिवार को कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कहा था कि जांच में आदिवासी महिला की मौत गिरने से होने की जानकारी सामने आई है। इस बयान के बाद ग्रामीण आक्रोशित हो गए। मृतका के पति ने कलेक्टर के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा- घटना के बाद कोई अधिकारी उनसे मिलने नहीं पहुंचा। मौत की परिस्थितियों को लेकर कलेक्टर के बयान और पति के दावे में विरोधाभास है।
न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में चल रहा सत्याग्रह
रीवा के सिरमौर क्षेत्र में टाटा पावर की प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर परियोजना को लेकर सरई कला और रोझौही के ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। 9 अक्टूबर को रोझौही में तकनीकी जांच के लिए बोरिंग मशीनें पहुंचीं तो ग्रामीणों ने काम रुकवा दिया। 10 अक्टूबर को कंपनी, प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हुई बैठक भी बेनतीजा रही। ग्रामीण जमीन, पानी, पर्यावरण और ग्रामसभा की सहमति को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कलेक्टर का कहना है कि परियोजना के लिए अभी जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ है। केवल परीक्षण का काम किया जा रहा था। विमला कोल की मौत के बाद अब विवाद परियोजना के विरोध से आगे बढ़कर मौत की परिस्थितियों और प्रशासन के बयान तक पहुंच गया है।





