बड़ी खबर : गौशालाओं की आड़ में गोवंश तस्करी का काला कारोबार, एफआईआर दर्ज

सामाजिक कार्यकर्ता और गौवंशों के अधिकार के लिए काम करने वाले एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी की शिकायत पर गढ़ थाने में गोतस्करी एवं पशु क्रूरता को लेकर अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है। बताया गया की घटना 01 सितंबर 2025 रात्रि लगभग 9:00 की है। जब पंजाब सिंह परिहार, विपिन सिंह परिहार, धीरज सिंह परिहार, मार्तंड सिंह परिहार, कमलेश पांडेय, प्रभाकर सिंह आदि की उपस्थिति में एक बोलेरो पिकअप क्रमांक एमपी 19 जीए 6606 मौके के वारदात पर सेदहा मोड़ के पास पकड़ा गया था जहां लगभग एक दर्जन को गौवांशों को ठूस ठूस कर भरा गया था। इस प्रकार क्रूरता पूर्वक क्षमता से अधिक मवेशी भरे जाने के कारण लगभग एक डेढ़ वर्ष की बछिया की दबकर मृत्यु भी हो गई थी। इसके बाद गढ़ थाना पुलिस को जानकारी दी गई एवं तत्काल एक्शन लेते हुए गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय ने अपना दल भेजा और मौके पर बोलेरो को जब्त कर आरोपियों को थाने ले गए। इसके अगले दिन दिनांक 02 सितंबर 2025 को अपराध क्रमांक 393/2025 पंजीबद्ध कर लिया गया और मामला विवेचना में ले लिया गया है।

सरकार का गौ संरक्षण के नाम पर करोड़ों की राशि का बंदरवाट
मध्यप्रदेश सरकार जहां एक ओर गौ-संरक्षण और गौशालाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर जमीन पर हालात कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं। रीवा जिले के थाना गढ़ क्षेत्र के सेदहा/बड़ियोर गांव में बीते दिनों एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक तंत्र और गौशाला संचालन की सच्चाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पिकअप वाहन में भरे मिले दर्जन से अधिक गोवंश
शिकायतकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने थाना गढ़ में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि 1 सितंबर 2025 की रात करीब 9 बजे गांव में संदिग्ध पिकअप वाहन क्रमांक MP19GA6606 पकड़ा गया। जब ग्रामीणों ने वाहन की तलाशी ली, तो उसमें डेढ़ दर्जन से अधिक गाय, बैल और बछड़े ठूंसे हुए मिले। आरोप है कि मवेशियों को इस तरह ठूस-ठूसकर भरा गया कि कई बछड़े घायल हो गए और दम घुटने से एक बछिया की मौत भी हो गई।

गौशाला की आड़ में तस्करी का खेल
रिपोर्ट के मुताबिक, गदही गौधाम में संचालकों के सहयोग से आरोपी दिलीप गुप्ता (निवासी बड़ियोर, थाना गढ़) और लाला चतुर्वेदी (निवासी हिनौती) एवं अन्य लंबे समय से गोवंशीय पशुओं को इसी तरह अवैध ढंग से गौशाला के नाम पर लाते रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यह केवल गौशाला संचालन का मामला नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर तस्करी और पशु क्रूरता का संगठित नेटवर्क है, जो वर्षों से प्रशासन की नाक के नीचे फल-फूल रहा है।

ग्रामीणों के सबूत, प्रशासन की चुप्पी
ग्रामीणों ने पूरी घटना के वीडियो और फोटो पुलिस को सौंपे हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि किस तरह पशुओं को अमानवीय ढंग से वाहन में ठूंसा गया था। यही नहीं, इससे पहले भी कई बार ग्रामीणों ने शिकायतें कीं, लेकिन कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रही। सवाल यह है कि गौशाला प्रबंधन और परिवहन नियमों की जिम्मेदारी किसकी है? और क्या वजह है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद दोषियों पर ठोस कार्यवाही नहीं हो पाती?

कानूनी धाराएँ और जांच की दिशा
थाना गढ़ पुलिस ने इस मामले में पशु क्रूरता अधिनियम 1960 की धारा11(1)(ए), 11(1)(घ), 11(1)(ई), 11(1)(एच), के तहत एफआईआर दर्ज कर दी है। जांच का जिम्मा हेड कांस्टेबल राहुल बर्सेना को सौंपा गया है। लेकिन ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों को शक है कि यह मामला भी पहले की तरह दबा दिया जा सकता है।

सरकार और प्रशासन से सीधे सवाल

1. जब सरकार हर साल गौशाला संचालन के लिए करोड़ों की राशि जारी करती है, तो फिर इस तरह की अव्यवस्था क्यों?
2. क्या गौशाला प्रबंधन केवल नाम का है और वास्तविकता में यह तस्करी और धंधेबाजी का अड्डा बन चुका है?
3. प्रशासन और पशुपालन विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर किसके हितों की रक्षा कर रही है – गौवंश की या फिर तस्करों की?4. ग्रामीणों के सबूत और आवाज़ बार-बार क्यों अनसुनी की जाती है?

गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय ने टीम के साथ मौके का किया निरीक्षण
गढ़ थाना प्रभारी एवं टीआई अवनीश पांडेय ने दिनांक 5 सितंबर 2025 को करहिया सेदहा मोड़ के पास पुरानी बंद बड़ी प्राइवेट स्कूल के पास हुए इस घटनाक्रम का निरीक्षण किया एवं मौका मुआयना करते हुए नक्शा वगैरह बनाया। थाना प्रभारी ने बताया की अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है और बहुत जल्दी कार्यवाही की जाएगी। पुलिस ने जानकारी दी की फिलहाल इस पूरे मामले में और कौन-कौन से तार जुड़े हुए हैं इसकी विवेचना की जा रही है।

ग्रामीणों की मांग – उच्चस्तरीय जांच हो
ग्रामीणों और शिकायतकर्ता ने स्पष्ट कहा है कि यदि इस रैकेट की उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो गौशालाओं के नाम पर जारी सरकारी फंड और योजनाएं केवल भ्रष्टाचार और पशु क्रूरता की कहानियों में बदलकर रह जाएंगी। उन्होंने मांग की है कि आरोपी वाहन मालिकों व गौशाला संचालकों पर कठोर कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में पशुओं के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार न हो।

यह सिर्फ एक पुलिस केस नहीं है, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश में गौशालाओं की आड़ में चल रहे कारोबार की पोल खोलने वाला मामला है। अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा तो गौसंरक्षण की आड़ में तस्करी का यह गोरखधंधा और भी गहरा जाएगा। (एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी)

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