परंपरागत शिल्पियों के लिए वरदान है पीएम विश्वकर्मा योजना – कलेक्टर

युवाओं को स्वरोजगार का अवसर देने तथा परंपरागत शिल्पियों के कौशल को बेहतर करने के लिए गत वर्ष से प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना लागू की गई है। इस योजना में परंपरागत शिल्प कौशल को बेहतर करने के लिए प्रशिक्षण, तीन लाख रुपए के बैंक ऋण और उत्पादित वस्तुओं के विपणन की सुविधा दी जा रही है। इस संबंध में कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने बताया कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना परंपरागत शिल्पियों के लिए वरदान है। लोहार, बढ़ई, कुम्हार, राजमिस्त्री, बांस के बर्तन बनाने वाले, नाव बनाने वाले, मूर्तिकार तथा खिलौने बनाने वाले जैसे परंपरागत शिल्पी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। रीवा में सुपाड़ी के खिलौने बनाने वाले परिवार भी अपने कौशल और व्यवसाय को बेहतर करने के लिए इस योजना का लाभ लें। जिले के 18 साल से अधिक आयु के शिल्पी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। आवेदक को किसी भी बैंक का डिफाल्टर नहीं होना चाहिए।

कलेक्टर ने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना में परंपरागत रूप से कला कौशल में दक्ष 140 जातियों को शामिल किया गया है। इस योजना में प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन पाँच सौ रुपए की स्टायपेंड की राशि तथा उपकरण खरीदने के लिए 15 हजार रुपए की सहायता का भी प्रावधान है। बैंक के माध्यम से तीन लाख रुपए तक के ऋण राशि देने का प्रावधान है। आवदेक को पात्र होने पर एक लाख रुपए की राशि प्रथम किश्त के रूप में दी जाती है। इस राशि का 18 महीने में पुन: भुगतान करने पर दूसरी किश्त के रूप में दो लाख रुपए की राशि दी जाती है। इसका 30 महीने में भुगतान करना होता है। उत्पादित वस्तुओं की गुणवत्ता परीक्षण के बाद नेशनल कमेटी फॉर मार्केटिंग द्वारा गुणवत्ता प्रमाण पत्र भी दिया जाता है जिससे स्वरोजगारी को वस्तुओं के विपणन में मदद मिले।

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