रीवा राजनीति : बड़ी संख्या में लोग भाजपा – कांग्रेस में हुए शामिल, क्या जनता ले रही फिरकी

चल रही लोकसभा चुनाव की बयार लगता है विपक्ष को महज इतिहास के पन्नो तक ही सीमित कर देगी। ऐसा इसलिए लिख रहा हूँ कि कभी एक समर्थन कि वजह से केंद्र से बेदखल होने वाली भाजपा ने विपक्ष को या उनके उपस्थित को महज जुमलों में समेट दिया है। बात अगर रीवा की करें तो जैसे-जैसे मतदान नज़दीक आ रहा वैसे-वैसे राजनैतिक दलों में कूद – फाँद वालों के साथ – साथ नये – नये कार्यकर्ताओं के शामिल होने का कारवाँ भी बढ़ता जा रहा है। बीते रविवार को जहां 300 लोग भाजपा में शामिल हुए तो वहीं सैकड़ों लोगों ने कांग्रेस की भी सदस्यता ले ली।

तक़रीबन 300 लोग भाजपा में शामिल 
मिली जानकारी के मुताबिक़ रीवा के ग्रीन लैंड मैरिज गार्डन में प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के हाथों सैकड़ों लोगों ने बीते रविवार को भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। सदस्यता अभियान में रीवा के जाने-माने चिकित्सक राकेश पटेल की पत्नी इंजीनियर कल्पना पटेल अपने समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गई। इस दौरान कल्पना पटेल ने कहा की भाजपा की रीति-नीति से प्रभावित होकर वे भाजपा में शामिल हुई हैं।

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कांग्रेस में भी 104 लोग जुड़े
वहीं सूत्रों की माने तो हिनौता में भी बड़ी संख्या में लोगों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस अभियान में सेमरिया विधायक अभय मिश्रा के हाथों लोगों को सदस्यता दिलाई गई। आपको बता दें वर्तमान भाजपा प्रत्याशी जनार्दन मिश्रा के भाई रोहणी मिश्रा भी बीजेपी का दामन छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ले चुके हैं। इस दौरान रोहणी मिश्रा ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए भाजपा को किसान विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि अगर कोई सही मायने में किसान है तो वो भाजपा को वोट नहीं देगा। आज मैं अपनी मर्जी से कांग्रेस में शामिल हो रहा हूं। किससे मेरा क्या रिश्ता-नाता है वो अलग विषय है लेकिन मेरी विचारधारा किसानों के पक्ष में है। कांग्रेस आईटी सेल की जानकारी के मुताबिक कार्यक्रम में लगभग 104 लोगों ने पार्टी की सदस्यता ली है।

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ऐसे में लोगों द्वारा क़यास लगाए जा रहे की कुछ लोग सिर्फ़ अपना धंधा पानी बचाने के लिए पार्टियों में शामिल हो रहे तो कुछ लोग ख़ुद को नेता कहलाने और धौंस जमाने के लिए राजनीतिक दलों में शामिल हुए हैं। अब जनता के बीच ऐसे मौक़ापरस्त नवनिर्मित नेता अपने आकाओं के लिए कितने लाभकारी होंगे यह तो चुनाव के बाद ही पता चल पायेगा।

 

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