विनायक स्व सहायता समूह कोनियाकला के 11 सदस्यों में से 7 सदस्यों ने खरीदी केन्द्र न बनाये जाने के लिए कलेक्टर को एफीडेविड सौंपा था। इसके बावजूद कुठिला समिति से खरीदी हटा कर विनायक स्व सहायता समूह कोनियाकला को धन उपार्जन सम्बन्धी कार्य सौंपा गया। इस मामले में पहले भी कई खबरों ने तूल पकड़ा था की कैसे समूहों को खरीदी देने की होड़ मची है। अब इसके पीछे की वजह क्या है इस पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता है। यह वही खरीदी केंद्र है जहाँ पर निरीक्षण के दौरान कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी त्योंथर के ऊपर केन्द्र प्रभारी द्वारा बदसलूकी कराये जाने का आरोप है।
शासन द्वारा कृषकों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए समितियो को केन्द्र बनाने की प्राथमिकता है। विगत खरीदी में त्योंथर व जवा अंतर्गत चौखण्डी, नीवा, दोदर, भुनगांव, कोनी, त्योंथर में स्व सहायता समूहो को धान खरीदी केन्द्र बनाया गया था, जिसमें समूह के केंद्रों में करोड़ों रूपये की धान शार्टेज का मामला आने से समूह अपात्र हो गये। इस वर्ष समूहो के केन्द्र बनाने के लिए नियम में बदलाव किया गया। लेकिन विनायक स्व सहायता समूह कोनियाकला के 11 सदस्यों में से 7 सदस्यों द्वारा धान खरीदी केन्द्र न बनाये जाने का एफीडेविड कलेक्टर को सौंपा गया था। सूत्रों के मुताबिक नियम के अनुसार केन्द्र बनाने के लिए सदस्यों की सहमति अनिवार्य रखी गयी थी लेकिन इस पर किसी का ध्यान नहीं गया। सूत्रों की माने तो त्योंथर क्षेत्र में कई समितिया पात्र हैं लेकिन उन्हें खरीदी केन्द्र नहीं बनाया गया। इस सम्बन्ध में आरोप कलेक्टर कार्यालय में खरीदी का दस्तावेज तैयार करने वाले उपार्जन बाबू पर लगाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक उपार्जन कमेटी के अधिकारीयों व कलेक्टर को गुमराह कर विनायक स्व सहायता समूह कोनियाकला को कूटरचित फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर उत्तर प्रदेश सीमा का सबसे अधिक धान की खरीदी करने वाला केन्द्र् कुठिला को समूह का खरीदी केन्द्र बना दिया गया। अब यह कितना सच कितना झूंठ यह जाँच का विषय है लेकिन सवाल तब खड़ा हो गया जब समूह की महिला सदस्यों ने बड़ी संख्या में समूह को खरीदी देने के लिए एफिडेविड लगाकर मना कर दिया, तो फिर समूह को खरीदी केंद्र कैसे आवंटित हुआ !


हाल ही में खरीदी केन्द्र कुठिला में नागरिक आपूर्ति निगम से भेजे गये बारदाने को लेकर बड़ा हंगामा हुआ। जिसका शोर विधायक से लेकर आला अधिकारीयों तक को सुनाई दिया। हालाँकि बारदाने को लेकर सूत्रों का कहना है की केन्द्र प्रभारी द्वारा किसानों को खरीदी के लिए बारदाने खत्म बताकर अवैध रूप से धान बेचने वालों में बाँट दिया गया। इस मामले में किसानों ने भी आरोप लगाया है की बारदाने घर ले जाने के लिए दिए जाते हैं और हमें इंतजार करवाते हैं। इस बात का साक्ष्य विजुअल भी मौजूद है।
लगातार बारदाने की मांग को लेकर जब केन्द्र पर जांच करने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पहुंचे तो केन्द्र पर शासन की निर्धारित व्यवस्था हवाहवाई मिली। साथ ही बारदाने के सम्बन्ध में जब सवाल हुआ तो समूह के पास 10 गठान बारदाने का हिसाब ही नहीं था। इस दौरान किसान के रूप में मौजूद कई जुगाड़ियों द्वारा हो हल्ला मचाना शुरू कर दिया गया और अधिकारी पर ही हावी होने का प्रयास किया जाने लगा। यह सब उस 4 मिनट 38 सेकंड के वीडियो में कैद है, जिसको छुपाने का प्रयास किया गया। उस वीडियो में उपेन्द्र पयासी विक्रेता समिति कुठिला, मनीष मिश्र पूर्व आपरेटर कुठिला वर्तमान आपरेटर त्योंथर, सुरेंद्र मिश्र, अभिषेक पटेल रिंकू सरपंच ग्राम पंचायत कोनियाकला, आदि देखे जा सकते हैं। हालाँकि इन सब की मौजूदगी विनायक स्व सहायता समूह खरीदी केंद्र कुठिला में होना संदिग्ध है। जब बार – बार अधिकारी द्वारा बारदाने के सम्बन्ध में पूंछा जाने लगा तो हंगामा और बढ़ गया और अधिकारी का ध्यान जाँच से हटाकर दूसरी तरफ करने के लिए सुनियोजित तरीके से मामले को तूल दिया जाने लगा। हालाँकि मामला इतना बिगड़ गया की अधिकारी को वहां से हटना पड़ा। सूत्रों की माने तो वहां मौजूद कुछ लोगों का सीधा रिश्ता खाद्य विभाग के उपार्जन अधिकारीयों से है जिसकी वजह से बेख़ौफ़ हो कर हंगामा किया गया। मामले को लेकर कुछ ही देर में कनिष्ठ अधिकारी पर महिला से अभद्रता, किसानों से अभद्रता, आदि का व्हाट्सअप पर मैसेज शुरू हो गया लेकिन कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया। इस सम्बन्ध में जब वायरल वीडियो को देखा गया तो बात वहां मौजूद लोगों के खिलाफ ही पाई गई। वायरल वीडियो में साफ सुनाई और दिखाई दे रहा है की जैसे ही अधिकारी द्वारा बारदाने के सम्बन्ध में दस्तावेज बनाने की कागजी कार्यवाई शुरू की गई सुनियोजित तरीके से हंगामा शुरू कर दिया गया। अब ऐसे में सवाल उठता है की अपने घरों से दूर दराज सरकारी सेवा में कार्यरत अधिकारी जब जाँच करने पहुँचते हैं तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है ? क्यूंकि अभी कुछ दिनों पहले ही अवैध खनन को रोकने गए एक अधिकारी को ट्रैक्टर चढ़ा कर मार दिया गया था। फ़िलहाल इस मामले में कितनी गंभीरता से जाँच होगी और कौन दोषी पाया जायेगा यह अभी भविष्य के गर्त में है लेकिन दाल में कुछ काला है इससे मना नहीं किया जा सकता है।




