पानी ज़हरीला, हवा खतरनाक – क्या रीवा बनेगा दूसरा फुकुशिमा?

रीवा जिले की त्यौंथर तहसील में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए टमस (टोंस) नदी के जल आवंटन की स्वीकृति के खिलाफ स्थानीय अधिवक्ताओं और नागरिकों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। बुधवार, 5 नवंबर 2026 को त्यौंथर तहसील के अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर देश के प्रधानमंत्री के नाम एक तीखा विरोध ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं तहसीलदार त्यौंथर पारस नाथ मिश्रा को सौंपा। अधिवक्ताओं का कहना है कि मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा गत 15 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के तहत मेसर्स टाटा पावर लिमिटेड को ग्राम रोझौही (जिला रीवा) में प्रस्तावित 4 गुणा 220 मेगावाट क्षमता के न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए टमस नदी से 84.096 मिलियन घन मीटर (MCM) जल वार्षिक आवंटित करने की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है, जो इस क्षेत्र के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है।

टमस नदी के जल आवंटन और प्लांट से क्षेत्र पर मंडराते गंभीर खतरे:
कृषि और सिंचाई पर संकट: त्यौंथर क्षेत्र पूरी तरह कृषि पर आधारित है और यहाँ के किसान सिंचाई के लिए प्रत्यक्ष रूप से टमस नदी के पानी पर निर्भर हैं। इतनी विशाल मात्रा में औद्योगिक उपयोग के लिए जल मोड़े जाने से क्षेत्र में भीषण सिंचाई संकट उत्पन्न हो जाएगा।

पेयजल और भू-जल स्तर में भारी गिरावट:
यह नदी पूरे अंचल के पेयजल आपूर्ति और भू-जल स्तर का मुख्य आधार है। नदी का पानी व्यावसायिक उपयोग में जाने से पूरे क्षेत्र में गंभीर पेयजल संकट गहरा जाएगा। पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकी क्षति: जल संसाधन विभाग की शर्तों के अनुसार नदी पर बैराज और भंडारण संरचनाओं के निर्माण से टमस नदी का स्वाभाविक प्रवाह बाधित होगा, जिससे स्थानीय पर्यावरण और जलीय पारिस्थितिकी को अपूरणीय क्षति पहुँचेगी।

रेडिएशन और गंभीर बीमारियों का खतरा:
न्यूक्लियर पावर प्लांट में इस्तेमाल होने के बाद टमस नदी में वापस छोड़े जाने वाले पानी और रेडिएशन युक्त कचरे से कैंसर और जन्मजात आनुवंशिक अपंगता जैसी असाध्य बीमारियों के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।

वैश्विक शोध का हवाला:
वर्ष 2024 में ‘करेंट एनवायरमेंट’ मैगजीन में प्रकाशित शोध के अनुसार, दुनिया के 175 न्यूक्लियर पावर प्लांटों के 30 किमी के दायरे में रहने वाले नागरिकों पर रेडिएशन के घातक प्रभाव देखे गए हैं, जिसके तहत बोन कैंसर, लंग कैंसर, किडनी कैंसर, इंटेस्टाइन कैंसर, लिवर कैंसर, ल्यूकीमिया (ब्लड कैंसर) और थायराइड कैंसर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

अधिवक्ताओं की दो टूक मांग, जीवन का कोई विकल्प नहीं: न्यूक्लियर पावर प्लांट निरस्त करे सरकार
अधिवक्ता संघ ने चेतावनी दी है कि जनहित, कृषक हित, जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए टमस नदी से न्यूक्लियर पावर प्लांट को 84.096 मिलि.घन.मी. जल आवंटन करने की सैद्धांतिक स्वीकृति को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए और न्यूक्लियर पावर प्लांट को भी रीवा से निरस्त किया जाय क्योंकि रीवा घनी आबादी वाला एवं इकोसिस्टम से परिपूर्ण क्षेत्र है जहां कैंसर प्लांट की कोई आवश्यकता नहीं। यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया, तो अधिवक्ता संघ आम जनता के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

इस दौरान ज्ञापन सौंपने वालों में अधिवक्ता संघ के सचिव प्रदीप मिश्रा, उपाध्यक्ष विवेक तिवारी, बालकृष्ण मिश्रा, पंकज तिवारी, संदीप पांडेय, अरविंद कुमार दुबे, अनिल कुमार तिवारी, सुनील कुमार साकेत, राजकिशोर मिश्रा, राजनारायण पांडेय, अजय कुमार साकेत एवं संजीव कुमार माझी सहित अन्य कई गणमान्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।

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