बंदरबांट की बाढ़ में बह गया विकास, सड़क तो सड़क शांति धाम भी हुआ शिकार

गंगेव। ग्राम पंचायतों में आम जनता के टैक्स के पैसे का किस हद तक बंदरबांट किया जा रहा है। इसका एक नमूना गंगेव जनपद की कराधान घोटाले में फंसी चंदेह ग्राम पंचायत में भी देखने को मिल। सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी, जनपद पंचायत गंगेव सदस्य गणेश सिंह, चन्देह के पूर्व सरपंच रमेश शर्मा, सुरेश उपाध्याय, धीरेंद्र पांडेय, शैलेंद्र पटेल एवं मीडिया कर्मी अतीत गौतम एवं गांव के अन्य गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा क्रमांक 1 टीपी गुरद्वान मौके पर शिकायत में उल्लेखित बिंदुओं का भौतिक परीक्षण किया तो उनके भी होश उड़ गए। उखड़ी पीसीसी सड़क गुणवत्ताविहीन कार्य देखकर उन्होंने कहा इसकी एक बार पुनः तकनीकी स्तर से जांच की जाएगी। वहीं नदी के ऊपर बनाए गए बिना बेस के एप्रान पानी के साथ बहते हुए दिखे। यदि इस साढ़े 14 लाख रुपए के इस रपटे पर नजर डालें तो इसमें आधे से अधिक रिकवरी भी बनना तय है क्योंकि तकनीकी मापदंडों से हटकर नदी में बनाया गया रपटा ज्यादा दिनों तक टिक पाएगा इसकी संभावना बहुत कम है। अन्य कई रपटे निर्माण होना भी कागज में बताया गया है लेकिन मौके पर कुछ नही मिला जिससे किस किस के लिए पेमेंट हुआ और कौन कौन कार्य स्वीकृति के बाद हुए यह भी निर्धारित किया जाना शेष है।

शांतिधाम निर्माण और उसकी बाउंड्री वाल पड़ी अधूरी
मौके पर भौतिक परीक्षण में पाया गया की ग्राम पंचायत चंदेह में तारी खुर्द के पास बनाया गया शांतिधाम सिर्फ नीचे का बीम डालकर छोड़ दिया गया है, वहीं मिट्टीकरण के नाम पर शांतिधाम में बाहर से मिट्टी ढोकर लाना बताया गया जबकि आसपास के कई उभरे हुए मिट्टी के टीलों को देखने पर पता चला कि कहीं कोई बाहर से मिट्टी नहीं लाई गई और उसी को समतल कर दिया गया था। वहीं शांतिधाम के चारों तरफ बनाई गई बाउंड्री वाल अधूरी पड़ी थी और गांव में बनाई जाने वाली ईट के भट्टे से उठाई गई ईंटों और डस्ट से गुणवत्ताविहीन अमानक कार्य कराया गया था।

उधड़ी पीसीसी सड़कें सड़कों ने स्वयं बयान किया घटिया काम
मौके पर भौतिक सत्यापन के लिए पहुंचे कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा टीपी गुरुद्वान ने पीसीसी सड़कों का मुआयना किया तो पाया कि कई पीसीसी सड़कें अलग-अलग नामों से बनाई गई हैं। जबकि वहां पर कोई अन्य पीसीसी सड़के मौजूद नहीं थी जिसके विषय में अभिलेख उपलब्ध होने पर देखा जाएगा कि आखिर अलग-अलग नामों से एक ही स्थान पर पीसीसी सड़कें कैसे बनी हुई है और उनकी आखिर लंबाई कितनी हैं? वर्ष 2016-17 के बीच बनाई गई कुछ सीसी सड़कें पूरी तरह से उखड़ी हुई मिली और उनमें कई दरारें देखने को भी मिलीं। ऊपर की सरफेस तो उखड़ी हुई पाई गई हैं। कुछ पीसीसी सड़कों की लंबाई पर भी संदेह हुआ जिसकी वापस तकनीकी जांच किया जाना अभी बाकी है। कुल मिलाकर लगभग पीसीसी सड़कों में अमानक सामग्री का उपयोग किया होना पाया गया जो तकनीकी स्वीकृति को दरकिनार करते हुए बनाई गई है।

चबूतरो और पुलियों के निर्माण में भी अमानक सामग्री का किया गया उपयोग
भौतिक सत्यापन के दौरान बनाए गए चबूतरो में चारों तरफ दरारे में पाई गईं जो अमानक और गुणवत्ताविहीन कार्य का द्योतक है। हालाकी किसी भी कार्य को खोदकर नहीं देखा गया कि उनके अंदर जो सामग्री डाली हुई बताई गई है क्या वह तकनीकी मापदंडों के अनुसार थी अथवा नहीं। लेकिन मौके पर भौतिक सत्यापन के दौरान जो स्थिति मिली उससे साफ स्पष्ट था कि न तो चबूतरे और न ही पुलों के निर्माण में तकनीकी मापदंडों का पालन किया गया था। पिछले 2 वर्षों में चुनाव के पूर्व कराए गए इन कार्यों में दरारें और अमानक गुणवत्ता देखने को मिली। कई कार्य उखड़े हुए भी पाए गए। जाहिर है जिन कार्यों में दरारें और उखड़ी सतहें मिलीं वह अमानक और गुणवत्ताविहीन कार्य ही कहें जाएंगी।

इस प्रकार ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 1 के कार्यपालन यंत्री टीपी गुरद्वान एवं अन्य गणमान्य जनों की उपस्थिति में कार्य के भौतिक सत्यापन में गड़बड़ियां पाई गई हैं। मामले पर जांच अधिकारी टीपी गुरद्वान ने कहा कि जल्द ही अभिलेख प्राप्त कर जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी। ( शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्त्ता )

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