सफलतापूर्वक किया गया विंध्य का पहला पीडियाट्रिक कार्डियक प्रोसीजर

विंध्य क्षेत्र में चिकित्सा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि मिली है। रीवा के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. एस.के. त्रिपाठी ने एक 6 वर्षीय बालिका के हृदय के जन्मजात दोष को सफलतापूर्वक बंद कर क्षेत्र का पहला बाल चिकित्सा (पीडियाट्रिक) कार्डियक प्रोसीजर संपन्न किया है । पन्ना की निवासी छह वर्षीय नायरा बानो जन्म से ही हृदय में छेद की समस्या से जूझ रही थी, जिसके कारण उसका वजन नहीं बढ़ रहा था और वह बार-बार बीमार पड़ने के साथ जल्दी थक जाती थी। कई स्थानों पर भटकने के बाद जब परिजन सुपरस्पेशलिटी अस्पताल रीवा पहुँचे, तब डॉ. त्रिपाठी ने परीक्षण और इकोकार्डियोग्राफी के माध्यम से दो बड़ी नसों के बीच असामान्य कनेक्शन की पहचान की ।

अस्पताल के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य था क्योंकि यहाँ पहले बच्चों के हृदय से जुड़ी ऐसी जटिल प्रक्रियाएं नहीं की गई थीं। डॉ. त्रिपाठी ने अपनी कुशल टीम, जिसमें एनेस्थेटिस्ट डॉ. लाल प्रवीण, कैथ टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ शामिल थे, की सहायता से बिना किसी जटिलता के इस छेद को बंद कर दिया । इस सफलता पर डॉ. त्रिपाठी ने इसे पूरी टीम की सामूहिक मेहनत का परिणाम बताया और कहा कि अब विंध्य के बच्चों को उच्च स्तरीय हृदय उपचार स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगा । अधीक्षक डॉ. अक्षय श्रीवास्तव और अधिष्ठाता डॉ. सुनील अग्रवाल ने जानकारी दी कि बच्ची का यह पूरा इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क किया गया है । इस अभूतपूर्व सफलता को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल की रीवा को मेडिकल हब बनाने की दूरगामी सोच का परिणाम माना जा रहा है । इस उपलब्धि के बाद अब विंध्य क्षेत्र के मरीजों को महंगे इलाज के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी । प्रोसीजर के बाद अब बालिका नायरा पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रही है।

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