सोचिए, हमारे क्लास में 40 बच्चे हैं। अगर 1 बच्चा भी फीस की वजह से, किताब की वजह से, या “लड़की है” बोलकर स्कूल नहीं आ पाता, तो क्या हमारा स्कूल पूरा कहलाएगा? नहीं।बाबा साहब अंबेडकर ने कहा था – “शिक्षा शेरनी का दूध है। जो पिएगा वो दहाड़ेगा।”
तो हमारा फर्ज है कि हम उस शेरनी का दूध हर बच्चे तक पहुंचाएं।
हम 3 काम कर सकते हैं:
Share करो : अपने पुरानी किताबें, कॉपी, पेन उस दोस्त को दो जिसे जरूरत है
Support करो : अगर कोई पढ़ाई में कमजोर है तो उसे 15 मिनट टाइम दो
Sankalp लो : अपने गांव/कॉलोनी में पता करो कि कोई बच्चा स्कूल से छूट तो नहीं रहा
सरकार ने RTE कानून बनाया है। CSC पर स्कॉलरशिप के फॉर्म भरते हैं लेकिन असली बदलाव हमसे शुरू होगा।आइए आज शपथ लें – “मेरे स्कूल से, मेरे मोहल्ले से कोई भी बच्चा पढ़ने से वंचित न रहे”। जय हिंद!
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