रीवा। किसान कल्याण वर्ष 2026 के उपलक्ष्य में जनपद पंचायत गंगेव के ग्राम पंचायत खरहरी में एक दिवसीय कृषक जागरूकता अभियान एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारत सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में गंगेव विकासखंड के विभिन्न ग्रामों जैसे माला, खरहरी, जोड़ोंरी, बहिवार और बड़ोखर के बड़ी संख्या में किसान सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एल. वर्मा ने किसान राजेंद्र शुक्ला एवं विजयशंकर शुक्ला सहित अन्य उपस्थित किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड एवं प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण सामग्री का वितरण किया। उन्होंने बताया कि चयनित क्लस्टर खरहरी, बेलवा बड़गैयान, बेलवा कुर्मियान का मुख्य लक्ष्य रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देकर मिट्टी की उर्वरता को पुनर्जीवित करना और किसानों की आय बढ़ाना है। आत्मा परियोजना के तकनीकी प्रबंधक दीपक कुमार श्रीवास्तव एवं दीपिका तिवारी ने प्राकृतिक खेती के बारे में किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती एक ऐसी पद्धति है जहाँ रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का शून्य उपयोग होता है। इसके बजाय स्थानीय संसाधनों जैसे जीवामृत, घनजीवामृत, आच्छादन (मल्चिंग) और फसल विविधता का उपयोग किया जाता है, जिससे सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ती है।”
सटीक और निष्पक्ष खबरों के लिए जुड़ें विंध्य अलर्ट से – वॉट्सएप ग्रुप के लिए क्लिक करें
गंगेव फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी एवं जैव-आदान संसाधन केंद्र धवईया के निदेशक रामशरण तिवारी ने बताया कि प्राकृतिक खेती से किसानों की बाजार पर निर्भरता खत्म होती है। कार्यक्रम के दौरान ग्राम पंचायत खरहरी में संचालित गौ-शाला और बी.आर.सी. के बीच समन्वय स्थापित करने पर चर्चा हुई, ताकि गोबर और गौ-मूत्र जैसे प्राकृतिक आदानों की उपलब्धता सुलभ हो सके। वैज्ञानिकों और आत्मा परियोजना के दल ने क्षेत्र का भ्रमण कर चल रहे प्रदर्शनों का जायजा लिया। कृषकों को सुझाव दिया गया कि वे पी.जी.एस. के तहत अपने उत्पादों का प्रमाणीकरण कराएं, ताकि स्थानीय हाट बाजारों में उन्हें उपज का उचित मूल्य मिल सके। इस अवसर पर प्रदुम्न शुक्ला, सीताराम कुशवाहा, राजेश पटेल (माला), राजेश कुशवाहा, सुग्रीव साकेत सहित क्षेत्र के अनेक प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।



